जिस दिन से उत्तर प्रदेश के चुनावी नतीजे आये हैं टेलीविज़न और अखबारों में तरह तरह के विश्लेषण आने लगे हैं।
भारी भरकम सब्दो और आंकड़ो के के साथ हमे बताया जा रहा है की उत्तर प्रदेश में भाजप शानदारकी विजय के कारण क्या रहे। मजे की बात यह है की नतीजे आने से पहले किसी को भी ऐसे परिणामो का कयास न था !

अब हमे एक पोलिटिकल पण्डित कहते हैं की उत्तरप्रदेश में ” मोदी लहर ” थी तो दूसरे हमे बताते हैं की यह अमित शाह की “सोस्यल इंजीनिरयिंग ” का परिणाम है। टीवी पे एक विश्लेषक ने ” धार्मिक ध्रुवीकरण ” याने की “रिलिजियस पोलराइसेसन” कारण बताया भाजपा की जीत  का।
इन विश्लेषण लहर की बहती गंगा में कई राजनैतिक पंडितो ने हमें बताया की यूपी में मुसलमान वोट बंट गए और मुस्लिम महिलाओ ने बढ़ चढ़ कर भाजपा को वोट दिया- उनसे पूछा गया की ऐसा क्यों हुआ तो हमे बताया गया की भाजपा के नेताओ के ” तलाक ” विरोधी बयान की वजह से ऐसा हुआ।

इन भारी भरकम विश्लेषणों के सैलाब में एक हल्की फुल्की कागज की नाव याने की दिल्ली के अनजान गलियारों से एक आम नागरिक का विश्लेषण प्र्स्तुत है !

भाजपा की ईस शानदार जीत  को पांच सब्दो में ही समेटना हो तो यह कहना पड़ेगा की ” The best team has won ” सबसे उमदा टीम की जीत  हुई है ! इस चुनाव को अगर क्रिकेट की टेस्ट श्रृंखला की उपमा दी जाए तो यह स्वीकारना होगा की टीम के चयन से लेकर टेस्ट शृंखला की आखरी गेंद तक की भाजपा  की रणनीति कोई मुकाबला ही नही था।

पहले हम कोंग्रेस की बात करते हैं। लगता है की “कोंग्रेस क्रिकेट बोर्ड ” पूरी तरह से अस्त व्यस्त है। बोर्ड के अनुभवी मेम्बरो की टेस्ट श्रृंखला की रणनीति बनाने या खिलाड़ियो के चयन में कितनी पूछ है यह शायद किसी को भी नही पता। इन अनुभवी दिग्गजो को सबसे ज्यादा बेइज्जती उस दिन महसूस हुई होगी जब यूपी टेस्ट श्रृंखला के खिलाड़ियो के चयन और रणनीति बनाने के लिए श्री प्रशांत किशोर जी को इम्पोर्ट किया गया। लगता है की प्रशांतजी के आने के बाद कोंग्रेस के कन्फ्यूजन में बढ़ोतरी हुई। पहले  यूपी टेस्ट श्रृंखला के कप्तान के रूप में मंजी हुई और अनुभवी श्रीमती शीला  ” दीक्षित ” जी को भेजा गया।  लगा की कोंग्रेस ने अपने परम्परागत वोट बैंक में बढ़ोतरी की  कोई रणनीति बना ली है। पर शीलाजी  पेवेलियन से बाहर खेलने के लिए आएं उससे पहले ही सपा के साथ संगठन की बात चल पड़ी और शीलाजी को पवेलियन  से ही वापिस बुला लिया गया ! टेस्ट श्रृंखला प्रारम्भ के पहले ही कोंग्रेस ने स्वीकार कर लिया की खेलने के लिए उनके पास पूरी टीम नही है।

अब बात करते हैं सपा याने की समाजवादी पार्टी की। यूपी टेस्ट श्रृंखला का कार्यक्रम घोषित होने से पहले ही “नेताजी ” मुलायम सिहं यादव की अगवानी वाले “सपा क्रिकेट बोर्ड ” और सपा टीम के युवा कप्तान अखिलेश यादव में खिलाड़ियों के चयन को लेकर महायुद्ध छिड़ गया। इस -” बाप -बेटा यादवास्थली “- सीरियल की स्क्रिप्ट किसी भी सास बहु सीरियल से कम मसालेदार नही थी। यह सीरियल जो चुनाव टेस्ट श्रृंखला के आखरी दिन तक चला पूरी तरह ” UN CENSORED ” था ! रोज सुबह जम कर खुले आम गाली गलौज होता और शाम को सुलह हो जाती। रातको रोज कोई नया विलन आ कर कहानी में टविस्ट देता और दूसरे दिन सुबह फिर वही “बाप -बेटा यादवास्थली” “यादवास्थली’ सीरियल में एकाद सीन   रामायण का भी आया जिसमे दो युवा राजकुमार – राहुल गाँधी और अखिलेश यादव – का भरत मिलाप हुआ।
याने की कोंग्रेस सपा का गठबंधन। पिता मुलायम सिंह ने लाख बार समझाने की कोशिश करी की यूपी की जनता इसे भरत मिलाप न मानकर सपा की कमजोरी समझेगी पर अखिलेश ने एक न सुनी। नेताजी मुलायम सिंह के साथ जुड़े  ” सपाइयों ” ने इसे “दुश्मन मिलाप” माना और इस बात से यूपी की जनता भी सहमत हुई  क्योंकि कुछ समय पूर्व तक सपा और कोंग्रेस जानी दुश्मन थे।

अब आप ही बताइए की इस परिवेश में क्या आप कोंग्रेस -सपा गठबंधन को वोट दे पाते ?
यूपी चुनाव के नतीजो  लिए क्या भारी भरखम विश्लेषण की जरूरत है ?
हमारे देश में एक पुराना जुमला है ” ये  पब्लिक है ये  सब जानती है “
क्या इतना कह देना सही नही होगा की   ये पब्लिक है ये  सब जानती है : The best team has won  !!!

 

 

2 responses

  1. Rasesh Shah Avatar
    Rasesh Shah

    Very true sir one word for complete win “The best team has won” what ever the opposition perception. Thing is Jo jeeta wohi sikandar

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  2. Pankaj faliya Avatar
    Pankaj faliya

    सर,
    आपका विशलेषण एकदम सटीक है,,,,खासतौर पर यूपी के संदर्भ में,,,, यूपी जो जातिवाद/ धर्मवाद का गढ माना जाता रहा है,,जहा पिछले कई वर्षो से सपा-बसपा यहाँ जाति ओर धर्म वाली खो-खो खेलती आ रही थी,,,,ओर आम भोली-भाली जनता में बि जे पी के उच्च जाति ओर धर्म विशेष का भ्रम फैलाकर कुप्रचारीत किया जा रहा था,,,,लेकिन पिछले ढाई साल के शासनकाल में मोदी जी देश में जिस प्रकार प्रत्येक वर्ग
    जाति,धर्म के लोगों के लिये जो योजनायें कायान्तरित की है,,,,जिससे आम जनता जिसे अपनी मूलभूत अधिकारों से भी महरूम रखा जा रहा था,,,उन्हे “सर्वजन सुखाय सर्वजन हिताय” की उतकृस्ट भावना के साथ खास महसूस कराया गया,,,जिससे वे जाति,धर्म के बन्धनो से ऊपर एक भारतीय होने के लिये गर्व महसूस करने लगा,,,,,ऊपर से रही सही कसर मोदीजी के मास्टरसट्रोक “नोटबंदी” ने पूरी कर दी,,,,जिसने एक ओर चुनावो में होने वाले धन के गलत इस्तेमाल पर रोक तो लगा हक दी,,,,साथ ही आम जनता ने भी जिसने थोडी दिक्कत झेलने के बाद भी ,,,,,, देशहीत के लिये इतना बढा ओर साहसी कदम उठाने वाले प्रधानमन्त्री जी का साथ देकर उन्हे दल विशेष नहीं,,,अपितू पूर्ण देश का सबसे महानतम राजनीतिक व्यक्तितव एक बार फिर से साबित कर दिया,,,,ओर एक के बाद एक हर राज्य की डोर उनके हाथ में देकर देश को विकासपथ पर अग्रसर करने की जनता ने भी अपनी जिम्मेदारी निभानी शुरू कर दी है,,,,बेहतर भारत के भविष्य की आशा के साथ
    साथ,,,,,,,
    जय हिन्द।
    जय माँ भारती।

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